मैया की कहानी, मैया की जुबानी 8

#मैया_की_कहानी_मैया_की_जुबानी_8 बाबूजी बाबूजी पक्के गांधीवादी थे। वो स्वतन्त्रता आन्दोलन में काफी सक्रिय रहे थे। 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान हमारे घर कई आन्दोलनकारी आते थे। रात के समय उनके लिए खाना बनता था। फिर बंगला(दालान) के भुसघरे(भूसा रखने की जगह) में छुपाकर उन्हें सुला दिया जाता था। उस समय मैं केवल आठ सालContinue reading “मैया की कहानी, मैया की जुबानी 8”

मैया की कहानी, मैया की जुबानी 7

उषा की मृत्यु मेरे जीवन की सबसे दुखद घटना थी। उस दिन मुझे इतना याद है कि मैं जार-बजार रोये जा रही थी और सरकार जी(सास), मेरी गोतनी (जेठानी) सभी मुझे ढाढस बंधाने की कोशिश कर रहीं थीं। मैं बार-बार रोती थी और अपने आप को कोसती थी कि मेरे साथ क्यों ऐसा क्यों होContinue reading “मैया की कहानी, मैया की जुबानी 7”

मैया की कहानी, मैया की जुबानी 6

1950-60 के आसपास भारत में शिशु मृत्यु दर काफी ज्यादा था। एक साल से कम उम्र के शिशुओं की मृत्यु सबसे ज्यादा होती थी। हमारे पड़ोस में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जिसमें किसी एक महिला के बच्चे की मृत्यु न हुई हो। हाल में मैं अपनी बड़ी दीदी के लड़के, बिनोद, से बातContinue reading “मैया की कहानी, मैया की जुबानी 6”

मैया की कहानी, मैया की जुबानी 4

शेरपुर में हमारा घर मिट्टी का था, उपर खपरैल। हमारे गांव में उस समय शायद सारे घर कच्ची दीवारों के ही थे। एक बार हमारे पड़ोस में चोरी हुई थी। चोर रात में घर के पीछे वाली दीवार में सेंध मारकर अंदर दाखिल हो गया। कच्ची दीवारों में सेंध मारना आसान होता है। सुबह उठकरContinue reading “मैया की कहानी, मैया की जुबानी 4”

मैया की कहानी, मैया की जुबानी 3

1950 में मैं सोलह साल की थी जब मेरी शादी हुई। आज के सन्दर्भ में शादी के लिए मेरी उम्र को कम कहा जा सकता है, गैरकानूनी भी। पर उस समय अगर लड़की सोलह साल की हो गई तो पिता को उसकी शादी की चिंता सताने लगती थी। ज्यादातर लड़कियों की शादी सोलह से कमContinue reading “मैया की कहानी, मैया की जुबानी 3”

मैया की कहानी, मैया की जुबानी 2

हमलोग चार भाई बहन थे— तीन बहन और एक भाई। तीनो बहनों में मैं सबसे छोटी थी और भाई हम सबसे छोटा। वह मुझसे आठ वर्ष छोटा है। उसके जन्म होने के पहले मैं घर में सबसे छोटी थी, सबकी लाड़ली भी। उस ज़माने में बेटे और बेटियों में बहुत भेद-भाव किया जाता था। वैसेContinue reading “मैया की कहानी, मैया की जुबानी 2”

मैया की कहानी, मैया की जुबानी 1

मेरा जन्म पटना से करीब 100 किलोमीटर पूरब एक छोटे से गांव में हुआ, जिसका नाम है शेरपुर। गांव के पूर्वी छोर पर गंगा बहती है, और पश्चिमी छोर पर है दिल्ली से हावड़ा को जोड़ने वाली मुख्य रेल मार्ग। मेरे घर और रेल लाइन के बीच केवल खेत ही खेत थे। बचपन से घरContinue reading “मैया की कहानी, मैया की जुबानी 1”

बेंगलुरू

बेंगलुरू महानगर मेंनकाब से झांकती आंखों सेदिखता है आज भीवही अपनापन वही मुस्कुराहट चौड़ी सड़कें अब भीआवारा बादलों की तरह घूमती रहती निरंतर अपने गंतव्य की ओर अपार्टमेंट की ऊंचाइयों से सुनाई पड़ती है इसकीसागर-सी गर्जन और गूंज जोदेर रात तक चलती रहती औरबढ़ती ही रहती तेज और तेज थकने पर बस झट सेलेती हैContinue reading “बेंगलुरू”

गांधी की हत्या पर एक अमरीकी उपन्यासकार के विचार (1949)

“सुना तुमने, उन्होंने महात्मा को ठिकाने लगा दिया,” एक महिला सहकर्मी ने सारा लॉरेंस कॉलेज के कॉफी हाउस में खाने की मेज पर बैठते हुए कहा। बातचीत की शुरुआत करते हुए उन्होंने महात्मा शब्द को इस लहजे में कहा मानो गांधी एक ढोंगी साधु हों, एक सपेरा। “महात्मा?” एक महिला अध्यापिका ने दोहराया, अपने कांटेContinue reading “गांधी की हत्या पर एक अमरीकी उपन्यासकार के विचार (1949)”

ऑरविल, एक आदर्श लोक: कितना सफल, कितना असफल?

पांडिचेरी से 12 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी के किनारे एक पठार पर अवस्थित ऑरविल एक ऐसा शहर है जिसकी शुरुआत महर्षि अरविंद की मृत्यु के बाद उनकी सहकर्मी एवं उत्तराधिकारी, मदर, ने 1968 में किया था। मदर ने ऑरविल के चार्टर में लिखा था कि औरेविल एक ऐसा आदर्श परिवेश होगा जहां दुनिया केContinue reading “ऑरविल, एक आदर्श लोक: कितना सफल, कितना असफल?”