पिछले सप्ताह सूचना मिली कि आशियाना नगर निवासी डॉ सुरेश प्रसाद की मृत्यु हो गई। मुझे लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है? डॉ सुरेश प्रसाद तो एक कवि थे। और कवि की मृत्यु नहीं होती। उनका देहावसान ज़रूर हो सकता है। डॉ साहब की उम्र करीब 90 के आसपास थी। उनके देह का अवसानContinue reading “चाय (महाकाव्य) की महिमा”
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बहरा गणतंत्र: पाठकों की प्रतिक्रियाएं
नरेश शर्मा मेरे मित्र अरुण जी, पूर्व प्राचार्य डीपीएस, जिन्हे मैं काफी पहले से जानता हूं। प्राचार्य और प्रोफेसर तो मेरे अनेकों मित्र हैं, पर अरुण जी थोड़ा हट कर हैं। उन्होंने एक अंग्रेजी कविता संग्रह, डेफ रिपब्लिक, का हिंदी में अनुवाद किया है। शीर्षक है बहरा गणतंत्र। अमरीकी कवि इल्या कामिंस्की के इस संग्रहContinue reading “बहरा गणतंत्र: पाठकों की प्रतिक्रियाएं”
Demystifying Poetry
Why poetry I too dislike it: there are things that are important beyond all this fiddle.Reading it, however,with a perfect contemp for it,one discovers in it after all,a place for the genuine.Hands that can grasp, eyesthat can dilate, hair that can rise….. This is an extract from a poem on Poetry by Marianne Moore. SheContinue reading “Demystifying Poetry”