पेरिस ओलंपिक 2024 से जुड़ा मल विसर्जन आन्दोलन

मल विसर्जन आन्दोलन। क्या कभी आपने इस तरह के आन्दोलन के बारे में सुना है? नहीं न। तो सुनिए। पेरिस ओलंपिक 2024 से जुड़े मल विसर्जन आन्दोलन के बारे में जो जून 2024 में अंतरराष्ट्रीय पटल पर सुर्खियों में था। खेलों के शुरू होने से ठीक एक महीने पहले। असल में जब से ओलंपिक 2024Continue reading “पेरिस ओलंपिक 2024 से जुड़ा मल विसर्जन आन्दोलन”

मतदाता की डायरी

एक जून 2024 को लोकसभा चुनाव के सातवें चरण का अन्तिम दिन था। हमारे शहर पटना में मतदान का दिन। आशियाना नगर के घर में हम बस तीन लोग हैं। पिता जी, बन्दना और मैं। इनमें 93 वर्ष के पिता जी सुपर सीनियर सिटीजन हैं। बाकी दोनों भी सीनियर सिटीजन बन चुके हैं। तीनों कोContinue reading “मतदाता की डायरी”

A Man from Motihari: a book review

Yesterday I finished reading A Man from Motihari, a novel by Abdullah Khan, published recently by Penguin. I had picked up the book after going through its review in the Hindu. The novel tells the gripping tale of a man from Motihari, the birthplace of the great English author George Orwell. Motihari is a smallContinue reading “A Man from Motihari: a book review”

वो युवक जिसने पेरिस में अपनी शादी रचाई होगी

मेरे मन में पेरिस से जुड़ी कहानियों की होड़ मची है। एक कहानी कह रही है मुझे निकालो, तो दूसरी कह रही मुझको कहो। कल देर रात हम फ्रांस में समुद्र पर बसे एक शहर की यात्रा से लौटे। वहां के मनोरम दृश्य और उनसे जुड़ी घटनाएं मन पर हावी थीं। पर अचानक आज सुबहContinue reading “वो युवक जिसने पेरिस में अपनी शादी रचाई होगी”

पेरिस में बच्चों ने मुझे कैसे ढूंढ़ा

बन्दना और बच्चों से अलग होने के बाद पेरिस के जिस मेट्रो स्टेशन पर मैं उतरा था उसका नाम है रिपब्लिक। यह पेरिस के एक महत्वपूर्ण स्मारक के बिल्कुल करीब है और उसका नाम भी रिपब्लिक (monument a la Republique) है। उसका निर्माण फ्रांसीसी क्रांति के 90वें सालगिरह के अवसर पर, 1879 में, हुआ था।Continue reading “पेरिस में बच्चों ने मुझे कैसे ढूंढ़ा”

पेरिस की पहली शाम और मैं खो गया

पेरिस की हमारी ये पहली शाम थी। हमने तय किया था कि सबसे पहले हम कुछ गर्म कपड़े खरीदेंगे। फिर सेन्न नदी के तट पर घूमेंगे। पुल से वहां के ऐतिहासिक स्थलों, इमारतों और शहर की गतिविधियों का अवलोकन करेंगे। सेन्न नदी पेरिस के ठीक बीच से होकर गुजरती है। यह शहर को दो भागोंContinue reading “पेरिस की पहली शाम और मैं खो गया”

चाय (महाकाव्य) की महिमा

पिछले सप्ताह मेरे व्हाट्सअप पर एक फोटो आया, जो नीचे संलग्न है। फोटो के नीचे लिखा था: चाय (महाकाव्य) पढ़िये। मेसेज भेजा था हमारे मुहल्ले के Rajiv Ranjan Prasad ने। फोटो को देखकर लगा कि राजीव जी ने अपने यहां मुझे चाय पे बुलाया है। उसी दिन जब वे शाम को मिले तो उन्होंने ‘चायContinue reading “चाय (महाकाव्य) की महिमा”

बहरा गणतंत्र: पाठकों की प्रतिक्रियाएं

नरेश शर्मा मेरे मित्र अरुण जी, पूर्व प्राचार्य डीपीएस, जिन्हे मैं काफी पहले से जानता हूं। प्राचार्य और प्रोफेसर तो मेरे अनेकों मित्र हैं, पर अरुण जी थोड़ा हट कर हैं। उन्होंने एक अंग्रेजी कविता संग्रह, डेफ रिपब्लिक, का हिंदी में अनुवाद किया है। शीर्षक है बहरा गणतंत्र। अमरीकी कवि इल्या कामिंस्की के इस संग्रहContinue reading “बहरा गणतंत्र: पाठकों की प्रतिक्रियाएं”

इल्या कमिन्स्की का काव्य-लोक: प्रेमकुमार मणि

मेरे नए मित्र अरुण जी (अरुण कमल नहीं) ने इल्या कमिन्स्की और उनकी कविताओं के बारे में जब पहली बार बात की थी, तभी से मैं इस कवि के बारे में उत्सुक था। ‘मगध’ के दूसरे अंक में अरुण जी का इस कवि पर लिखा गया एक लेख और उनकी कुछ कविताओं के अनुवाद प्रकाशितContinue reading “इल्या कमिन्स्की का काव्य-लोक: प्रेमकुमार मणि”

रेणु की कितने चौराहे: एक समीक्षा

फणीश्वर नाथ रेणु की कितने चौराहे एक प्रेरणादाई उपन्यास है। एक बालक के बड़े होने की कहानी, जिसमें परिवार, समाज और देश बराबर के भागीदार हैं। इस उपन्यास के लिए रेणु ने हमारे देश के एक महत्वपूर्ण काल खंड को चुना है। 1930-1942 का समय जब अंग्रेजों के खिलाफ आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गांधीContinue reading “रेणु की कितने चौराहे: एक समीक्षा”